अपनी मातृ भाषा पर गर्व करें : राज्यपाल

सत्य खबर,शिमला (अनीश चौहान ) 

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि हमें अपनी मातृ भाषा और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। हिन्दी एकमात्र ऐसी भाषा है, जो देश को एकसूत्र में बांध सकती है। राज्यपाल आज शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में कला, भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित राजभाषा हिन्दी सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। आचार्य देवव्रत ने कहा कि दुनिया के लगभग सभी विकसित राष्ट्रों ने अपनी भाषा के दम पर विकास की ऊंचाइयों को हासिल किया है और विकास के हर क्षेत्र में मातृ भाषा को अपनाकर आगे बढ़े हैं। हमें यह समझना चाहिए कि जो राष्ट्र आज महाशक्ति के रूप में उभरे हैं उसके पीछे उनकी भाषा की ताकत है। जबकि देश में आजादी के बाद भाषा के नाम पर ‘पाखण्ड’ से ही हिन्दी को काफी नुकसान हुआ।  उन्होंने चिंता जताई कि देश के अधिकांश उच्च संस्थानां व कार्यालयों में भाषा के नाम पर हम आम लोगों के साथ अन्याय कर रहे हैं और विदेशी भाषा की प्राथमिकता से आम आदमी अपनी बात से वंचित हो रहा है। आज़ादी के बाद भी अंग्रेजों की मानसिक गुलामी इस देश से नहीं गई, जबकि जापान व इज़राइल जैसे छोटे राष्ट्र अपनी मातृ भाषा को अपनाकर दुनिया में अपनी तकनीक का लोहा मनवा रहे हैं।  राज्यपाल ने कहा कि हिन्दी समारोह का आयोजन कर केवल औपचारिकताएं नहीं निभाई जानी चाहिए, इसे व्यवहारिक रूप दिया जाना चाहिए। दुनिया के 123 से अधिक देशों में हिन्दी बोली जाती है। उन्होंने कहा कि देश से उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं का विदेशों के लिए पलायन केवल हिन्दी भाषा में शिक्षा को देकर ही रोका जा सकता है।  उन्होंने विभाग द्वारा हिन्दी को प्रोत्साहन देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा प्रदेश भर से आए विद्यार्थियों तथा सरकारी कर्मियों को पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई दी। उन्होंने आग्रह किया कि मातृ भाषा को पूर्ण रूप से अपनाकर दूसरों को भी प्रेरित करें तभी देश में बदलाव लाया जा सकता है।  इससे पूर्व, राज्यपाल ने विभागीय वार्षिक राजभाषा पत्रिका, संस्कृति तथा बिलासपुर की संस्कृति पुस्तकों का विमोचन भी किया। राज्यपाल ने इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न विभागों एवं बोर्डों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राजभाषा पुरस्कार वितरित किए। उन्होंने विभिन्न स्पर्धाओं के विजेता विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया।

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