एडीसी सहित गांव के तीनों सरपंचों को 3 अक्टूबर कोर्ट में तलब, क्या है इसकी वजह पड़े पूरी खबर?

सत्य खबर भिवानी ( अमन शर्मा )

भिवानी जिला में बेमौसम बारीस से हालात इस कदर खराब हो गए हैं कि गांवों में खेतों के साथ गलियों व घरों से पानी नहीं निकल पा रहा है। समाधान ना होते देख और अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद थक हार कर अब धनाना गांव के लोगों ने स्थानीय कोर्ट की शरण ली है। कोर्ट ने एडीसी सहित गांव के तीनों सरपंचों को तलब करते हुए 3 अक्टूबर को अपना जबाव देने को कहा है।

तीन दिन हुई जोरदार बारिश से जिला के अधिकतर गांवों व खेतों में जलभराव हो गया। अचानक व बेमौसम बारीस का किसी को ना तो अंदाजा था और ना ही इसके कोई प्रबंध किए गए थे। ऐसे में बारिश का पानी ना केवल खेतों में बल्कि गांवों की अधिकतर गलियों व घरों में भी पानी भर गया। एक सप्ताब बित जाने के बाद भी पानी निकासी के पुख्ता प्रबंध ना होने से ग्रामीणों में काफी रोष है। अपनी पक्की पकाई फसलों को बर्बाद होते और घरों से ना निकल पाने से मजबूर धनाना गांव के किसानों ने तो अब अधिकारियों के चक्कर काटने और समाधान ना होने के चलते कोर्ट की शरण ली है।

धनाना गांव में हुए जलभराव ने 1995 की बाढ के मंजर की याद दिला दी। क्या गलियां, क्या घर, क्या स्कूल, अधिकतर जगह पानी ही पानी है। किसानों का आरोप है कि ड्रन की सफाई ना होने से उनके खेतों में तीन से चार फूट तक पानी खङा हो गया है। किसानों का कहना है कि उनकी कपास, बाजरा व धान की फसल खराब हो रही है और पानी निकासी की बजाय पानी रोज ज्यादा हो रहा है। ऐसे में कपास व बाजरा की फसलों के बाद अब कुछ दिनों में धान की फसल भी बर्बाद होने लगी है।
किसानों की याचिका को कोर्ट में लगाने वाले वकील पीके अत्री ने बताया कि गांव धनाना में जलभराव से हालात खराब है। खेतों व गांव में जलभराव से किसानों व ग्रामीणों को बहुत परेशानी हो रही है। ऐसे में पानी निकासी के प्रबंध ना होने पर किसानों की याचिका उन्होने कोर्ट में लगाई है और कोर्ट ने 3 अक्टूबर को एडीसी व गांव के तीनों सरपंचों को जबाव देने की तारीख तय की है।

गांव में जलभराव से परेशानी का दूसरे लोग सिर्फ अंदाजा लगा सकते हैं, एहसास केवल यहां रहने वालों को ही है। अब इसे किसानों की समझदारी कहें या जागरूकता, की अधिकारियों की अनदेखी के बाद गांव धनाना के लोगों ने रोड जाम या अन्य कोई गैरकानूनी कदम उठाने की बजाय कोर्ट की शरण ली है। किसानों के साथ वकील को भी अब उम्मीद है कि कोर्ट से उन्हे न्याय मिलेगा और हर साल होने वाली इस समस्या से राहत मिलेगी।

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