बूचड़ खाना बनी मरयोग की गऊ शाला

सत्यखबर, सोलन (अमनप्रीत सिंह पुंज) – सिरमौर की सीमा पर स्थित गाँव मरयोग के समीप पशु चिकित्सा फार्मासिस्ट की शिक्षा भी दी जा रही है और साथ ही गौ शाळा भी चलाई जा रही है| जिसे दुधारू पशु सुधार सभा द्वारा चलाया जा रहा है गौ शाळा का मुख्य उदेश्य भारत में मां का दर्जा हासिल करने वाली गौ को आश्रय देना है ताकि उन पर हो रहे अत्याचारों से उन्हें छुटकारा मिल सके| लेकिन यहाँ शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थी ने गौ शाळा का एसा चेहरा सोशल मीडिया जाहिर किया जिसे देख कर पैरों तले जमीन निकल जाए| जिसे देख कर बूचड़ खाने में गउओं पर हो रहे अत्याचार भी कम लगने लगे| सोशल मीडिया में आए इस वीडियों पर गउओं पर हो रहे अत्याचारों को कुछ इस तरह से दिखाया गया जिसे देख कर कोई भी आसानी से विचलित हो सकता है

सोशल मीडिया में अपलोड हुए इस वीडियो की हकीकत जानने के लिए हमारी टीम स्वंय गौ सदन में पहुंची तो पाया कि गौ सदन में तीन ब्लोक थे पहले ब्लोक में दुधारू पशुओं को रखा गया था दुसरे ब्लोक में उन गायों को रखा गया था जो थोड़े अस्वस्थ्य थे तीसरे ब्लोक में उनको रखा गया था जो बेहद कमजोर हो चुके थे और किसी ने किसी बिमारी से पीड़ित थे| दुसरे और तीसरे ब्लोक में जो गउएँ बंधी थी उन्हें देख कर एसा प्रतीत हो रहा था कि उन्हें शारीरिक यातनाएं ज्यादा और खाने के लिए कम दिया जाता होगा| जिसके कारण वह बेहद कमजोर हो चुकी थी और उनकी हड्डियाँ उनकी खाल से भी देखी जा सकती थी| जब इस बारे में कर्मचारियों से पुछा गया तो उन्होंने जो खुलासे किए वह और भी हैरान करने वाले थे उन्होंने बताया कि एक माह में करीबन 15 से बीस गाएं बिमार होने की वजह से मौत का ग्रास बन रही है जब उनकी मृत्यु होती है तो उन्हें गौ शाळा के पास बने गड्डे में फेंक दिया जाता है|

उन्होंने यह भी कहा कि जो गांय यहाँ आती है उसका यहाँ से जिंदा बच्च कर निकलना बेहद कठिन है| उन्होंने कहा कि उन्हें गायों को गड्डे में फेंकना और उनसे एसा बर्ताव करना अच्छा नहीं लगता है लेकिन उनेहं उच्च अधिकारियों के आगे नतमस्तक रहना पड़ता है| उन्होंने यह भी कहा कि लोगों की गउओं को भी 4000 रूपये लेकर वह गौशाला में शरण देते है और अगर वह उनकी सेवा नहीं कर सकते तो उन्हें एसा पाप नहीं करना चाहिए| वहीँ जब इस बारे में यहाँ के अधिकारी से पुछा गया तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया और मीडिया द्वारा उठाए प्रश्नों से बचते नजर आए |

आप को बता दें कि गउओं को खाने के लिए महज सूखी तूड़ी दी जाती है और उन्हें फीड तो क्या आस पास प्रचुर मात्रा में लगने वाला घास तक चरने नहीं दिया जाता | आप ने गरुड़ प्राण में सुना होगा कि मरने के बाद वैतरणी नदी से आत्मा को केवल गौ ही पार लगा सकती है लेकिन कलयुग में गौ ही वैतरणी नदी में फंसी नजर आ रही है क्योंकि मृत गउओं को जहाँ फैंका जा रहा है वह स्थान भी कोई वैतरणी नदी से कम नहीं है | इस लिए जो गउओं की इस स्थिति के जिम्मेवार है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए ताकि भविष्य में भारतवासियों की भावनाओं को कोई आहत न सके |

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